आज़ाद पत्रकार न्यूज। अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की एक इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने बीते कुछ महीनों के दौरान कई मुद्दों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से असहमति जताई है.इस रिपोर्ट के बाद राजनीतिक हंगामा शुरू हो गया है और विपक्ष के नेताओं ने सरकार और चुनाव आयोग की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं.इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के कदमों को लेकर ’10 महीने में 14 बार आपत्ति’ दर्ज कराई. रिपोर्ट के अनुसार, ‘ये आपत्तियां चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने, खुद को अंधेरे में रखने से लेकर नए मतदाताओं को जोड़ने और नाम हटाने को लेकर दर्ज कराईं और ‘अनधिकृत, गैरकानूनी’ कदमों पर सवाल उठाए.’भारत चुनाव आयोग (ईसीआई) की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया, जून 2025 में बिहार में शुरू हुई थी लेकिन अब तक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मसौदा मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जा चुके हैं. हालांकि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं उन्हें इसके ख़िलाफ़ अपील करके अपना जवाब देने का विकल्प दिया गया है.चुनाव आयोग की भूमिका पर विपक्षी दल पहले से सवाल उठाते रहे हैं।द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन मुद्दों पर तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के भीतर भी बार-बार सवाल उठाए गए थे और आपत्तियां दर्ज की गई थीं.इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार रितिका चोपड़ा ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कई फ़ैसलों पर आपत्ति दर्ज की.रिपोर्ट के मुताबिक़, जुलाई में नए मतदाताओं के लिए फ़ॉर्म 6 में एसआईआर से जुड़ा एक सवाल जोड़ा गया. मई में दोनों आयुक्तों ने कहा था कि क़ानून में बदलाव किए बिना ऐसा नहीं किया जा सकता. इसके बावजूद बदलाव किया गया और संधू ने इसे “अनधिकृत और ग़ैरक़ानूनी” बताया.रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने और अपीलों से जुड़े मामलों में भी दोनों आयुक्तों ने सवाल उठाए.जुलाई के अंत में दिल्ली में आयोग के प्रशासनिक विभाग में काम के बंटवारे को लेकर भी दोनों आयुक्तों ने आपत्ति की. उन्होंने कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखकर इसे आयोग को नियंत्रित करने वाले क़ानून का “स्पष्ट उल्लंघन” बताया. अगले दिन दोनों ने इस आदेश को रद्द कर दिया.रितिका चोपड़ा की रिपोर्ट के मुताबिक़, गोवा में 97 मतदाताओं को स्थानीय अधिकारियों ने योग्य पाया, लेकिन केंद्रीकृत सॉफ़्टवेयर में उनके नाम दर्ज नहीं हो सके. दोनों आयुक्तों ने मतदाता सूची तैयार करने में सॉफ़्टवेयर के केंद्रीकृत नियंत्रण को लेकर भी सवाल उठाए.


