चेन्नई – राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम में भी युवाओं का उत्साह बरकरार

चेन्नई – राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम में भी युवाओं का उत्साह बरकरार

चेन्नई। आज़ाद पत्रकार न्यूज। जलज बेदी। राहुल गांधी ने चेन्नई में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में कहा- लोकतंत्र खत्म करने वालों से डरने की जरूरत नहीं हैं। आइलैंड ग्राउंड्स में 30 मिनट के कार्यक्रम में राहुल ने कहा-

“सवाल पूछना हर स्टूडेंट की जिम्मेदारी है। सरकार तमिलनाडु पर हिंदी थोप रही है। तमिल कल्चर, भाषा इतिहास पर हमला किया जा रहा है। आपका वोट चोरी किया जा रहा है।”

राहुल कोटा, देहरादून, प्रयागराज, पुणे और इंदौर में युवाओं और छात्रों से इस कार्यक्रम में बात कर चुके हैं। यह कार्यक्रम पहली बार दक्षिण भारत में हुआ।

राहुल के भाषण की 5 बड़ी बातें…

1- पीएम मोदी पर: पीएम इंटरनेशनल दबाव में हैं। अस्तित्व के लिए लड़ रहे हैं। देश का मूड जनता जान गई है 2-दिल्ली प्रोटेस्ट पर: पूरी दिल्ली बंद है। पुलिस बच्चों को मार रही है, इंटरनेट बंद है। भाजपा के गुंडे सड़क पर घूम रहे, बच्चों को पीट रहे हैं। 3- तमिल कल्चर पर: तमिल कल्चर, भाषा और इतिहास पर हमला किया जा रहा है। तमिलनाडु पर हिंदी थोपी जा रही है। सरकार के लिए तमिल कल्चर और इतिहास सेकेंड्री है। 4- पेरियार पर: पेरियार महान इंसान थे, क्योंकि वे सवाल करते थे। पेरियार ने स्टूडेंट को सिखाया कि बिना समझे किसी भी विचार को फॉलो न करें। 5- एजुकेशन सिस्टम पर: सेंट्रलाइजेशन, 87% MBBS तमिल सीट कम की जा रही हैं। 70% यूनिवर्सिटी में वाइस चांसलर नहीं है, उसको RSS के गर्वनर चला रहे हैं।

यूथ इन इंडिया 2022’ की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण भारत के 5 राज्यों यानी आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरलम, तमिलनाडु और तेलंगाना में 15 से 29 साल की उम्र के करीब 7.5 करोड़ युवा हैं।इन्हीं पर राहुल का फोकस रहेगा। राहुल इस अभियान में शिक्षा, बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और युवाओं पर बढ़ते दबाव जैसे मुद्दे उठा रहे हैं।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले पांच कार्यक्रमों में करीब 1.54 लाख लोग शामिल हुए थे।

नीट पेपर लीक में जान गंवाने वाले छात्रा का भाई राहुल से मिला

मंच पर आया युवक राहुल से बोला- मैं उस बहन का भाई हूं, जिसकी नीट पेपर लीक मामले में जान चली गई। मैं आज दुनिया को बताने आया हूं कि उसने अपनी मौत से क्या सिखाया। वह जेंडर, कॉस्ट और अन्य तरह के भेदभाव में विश्वास नहीं करती थी। वह दलित थी।मुझे लगता है कि शिक्षा इकलौता हथियार है, जिसके जरिए गरीबी से बाहर निकाला जा सकता है। मेरे पिता ने हमें इसीलिए पढ़ाया, मेरी बहन भी पढ़ने में होशियार थी।

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